अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
पड़ जाएँ मिरे जिस्म पे लाख आबले 'अकबर'
पढ़ कर जो कोई फूँक दे अप्रैल मई जून
- अकबर इलाहाबादी
फूल ही फूल याद आते हैं
आप जब जब भी मुस्कुराते हैं
- साजिद प्रेमी
हाल-ए-दिल सुनते नहीं ये कह के ख़ुश कर देते हैं
फिर कभी फ़ुर्सत में सुन लेंगे कहानी आप की
- लाला माधव राम जौहर
जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का 'शकील'
मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया
- शकील बदायूंनी
Urdu Poetry: दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया