अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
पता अब तक नहीं बदला हमारा
वही घर है वही क़िस्सा हमारा
- अहमद मुश्ताक़
'मुनीर' इस ख़ूबसूरत ज़िंदगी को
हमेशा एक सा होना नहीं है
- मुनीर नियाज़ी
हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़'
हमारे साथ है साया हमारा
- अहमद मुश्ताक़
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा
- मीना कुमारी नाज़
Urdu Poetry: वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है