Urdu Poetry: वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा
- निदा फ़ाज़ली  

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साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
- कैफ़ भोपाली 

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भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
- सबा अकबराबादी 

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हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब
ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया
- शहज़ाद अहमद

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Urdu Poetry: हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

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