अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या
- जौन एलिया
आसमाँ अपने इरादों में मगन है लेकिन
आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है
- अनवर मसूद
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
Urdu Poetry: सज्दे किसी के दर पे किए जा रहा हूँ मैं