अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है
जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे
- अहमद फ़राज़
मुद्दत के ब'अद आज उसे देख कर 'मुनीर'
इक बार दिल तो धड़का मगर फिर सँभल गया
- मुनीर नियाज़ी
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
- बशीर बद्र
होशियारी दिल-ए-नादान बहुत करता है
रंज कम सहता है एलान बहुत करता है
- इरफ़ान सिद्दीक़ी
Urdu Poetry: मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा