Urdu Poetry: आने वाले बरसों बाद भी आते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं
- ज़ेहरा निगाह 

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झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
- कैफ़ी आज़मी 

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अब तो उन की याद भी आती नहीं
कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ
- फ़िराक़ गोरखपुरी  

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जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
- शहरयार 

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Urdu Poetry: वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से

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