Urdu Poetry: फूल खिले हैं गुलशन गुलशन

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन
- जिगर मुरादाबादी 

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क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में
- मिर्ज़ा ग़ालिब 

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हम ने घर की सलामती के लिए
ख़ुद को घर से निकाल रक्खा है
- अज़हर अदीब 

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शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
- बशीर बद्र 

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Urdu Poetry: जहाँ से देखा था पहली बार आसमान मैं ने

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