Urdu Poetry: कैसा जादू है समझ आता नहीं, नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

Image Credit :

कैसा जादू है समझ आता नहीं
नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के
- इब्न-ए-मुफ़्ती

Image Credit :

बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में
आबले पड़ गए ज़बान में क्या
- जौन एलिया 

Image Credit :

मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
ख़मोशी भी है ये आवाज़ भी है
- अर्श मलसियानी

Image Credit :

उस से मिलने की ख़ुशी ब'अद में दुख देती है
जश्न के ब'अद का सन्नाटा बहुत खलता है
- मुईन शादाब

Image Credit :

Urdu Poetry: सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े

Read Now