Urdu Poetry: हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया
- जिगर मुरादाबादी 

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जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर
ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
- जमील मज़हरी 

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ज़िंदगी ख़्वाब देखती है मगर
ज़िंदगी ज़िंदगी है ख़्वाब नहीं
- शबनम रूमानी 

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जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
- ज़फ़र सहबाई 

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Urdu Poetry: आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

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