अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएँ घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
- शकील बदायूंनी
ऐ ग़म-ए-दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते
किन बहानों से तबीअ'त राह पर लाई गई
- साहिर लुधियानवी
आज भी बुरी क्या है कल भी ये बुरी क्या थी
इस का नाम दुनिया है ये बदलती रहती है
- एजाज़ सिद्दीक़ी
कुछ छलकता है कुछ बिखरता है
सब मिले तो भी सब नहीं मिलता
- मोहम्मद आज़म
Urdu Poetry: जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन