अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है
- हैदर अली जाफ़री
कभी ख़िरद कभी दीवानगी ने लूट लिया
तरह तरह से हमें ज़िंदगी ने लूट लिया
- हफ़ीज़ बनारसी
जिस से ये तबीअत बड़ी मुश्किल से लगी थी
देखा तो वो तस्वीर हर इक दिल से लगी थी
- अहमद फ़राज़
देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ सा कहाँ से उठता है
- मीर तक़ी मीर
Urdu Poetry: किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के