अमर उजाला काव्य डेस्क
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ
- अनवर शऊर
दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
- अहमद फ़राज़
इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
- मिर्ज़ा ग़ालिब
गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है 'अमीर'
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
- अमीर मीनाई
Urdu Poetry: यूँ जो तकता है आसमान को तू, कोई रहता है आसमान में क्या