अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
- गुलज़ार
ज़र्रा समझ के यूँ न मिला मुझ को ख़ाक में
ऐ आसमान मैं भी कभी आफ़्ताब था
- लाला माधव राम जौहर
आहटें सुन रहा हूँ यादों की
आज भी अपने इंतिज़ार में गुम
- रसा चुग़ताई
वही फ़िराक़ की बातें वही हिकायत-ए-वस्ल
नई किताब का एक इक वरक़ पुराना था
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
Urdu Poetry: दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं