अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
शाख़ें रहीं तो फूल भी पत्ते भी आएँगे
ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएँगे
- अज्ञात
ढलेगी शाम जहाँ कुछ नज़र न आएगा
फिर इस के ब'अद बहुत याद घर की आएगी
- राजेन्द्र मनचंदा बानी
न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर
कई साल ब'अद मिले हैं हम तेरे नाम आज की शाम है
- बशीर बद्र
रंग आँखों के लिए बू है दिमाग़ों के लिए
फूल को हाथ लगाने की ज़रूरत क्या है
- हफ़ीज़ मेरठी
Urdu Poetry: ये शख़्स ख़ूब है अशआर के अलावा भी