अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ऐसे हिज्र के मौसम कब कब आते हैं
तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं
- शहरयार
मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया
- साहिर लुधियानवी
दुनिया है संभल के दिल लगाना
यां लोग अजब अजब मिलेंगे
- मीर हसन
दुआ करो कि ये पौदा सदा हरा ही लगे
उदासियों में भी चेहरा खिला खिला ही लगे
- बशीर बद्र
World Water Day: दरिया पर कहे शेर