अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
- ज़फ़र सहबाई
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ ख़रीदार नहीं हूँ
- अकबर इलाहाबादी
धूप ने गुज़ारिश की
एक बूँद बारिश की
- मोहम्मद अल्वी
Urdu Poetry: ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते