Urdu Poetry: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
- निदा फ़ाज़ली 

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भले ही लाख हवालों के साथ कहते हैं
मगर वो सिर्फ़ किताबों की बात कहते हैं
- सदा अम्बालवी 

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किसी को भेज के ख़त हाए ये कैसा अज़ाब आया
कि हर इक पूछता है नामा-बर आया जवाब आय
- अहसन मारहरवी 

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ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म
ये ग़म होगा तो कितने ग़म न होंगे
- हफ़ीज़ होशियारपुरी                    

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Urdu Poetry: उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

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