Urdu Poetry: ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
- इमरान-उल-हक़ चौहान 

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मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए
मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ
- मिर्ज़ा अतहर ज़िया  

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कभी आँखें किताब में गुम हैं
कभी गुम हैं किताब आँखों में
- मोहम्मद अल्वी   

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मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तू
कौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूँ
- साहिर लुधियानवी 

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Urdu Poetry: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई, जैसे एहसाँ उतारता है कोई

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