Urdu Poetry: ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए है
- जाँ निसार अख़्तर  

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ज़ोर क़िस्मत पे चल नहीं सकता
ख़ामुशी इख़्तियार करता हूं 
- अज़ीज़ हैदराबादी  

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फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन
- जिगर मुरादाबादी 

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पहली बार वो ख़त लिक्खा था
जिस का जवाब भी आ सकता था
- शारिक़ कैफ़ी   

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Urdu Poetry: यूँ जो तकता है आसमान को तू, कोई रहता है आसमान में क्या

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