Urdu Poetry: किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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यूँही मौसम की अदा देख के याद आया है
किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ
- अहमद फ़राज़ 

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मेरे पास से उठ कर वो उस का जाना
सारी कैफ़िय्यत है गुज़रते मौसम सी
- ज़ेब ग़ौरी 

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एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा
- निदा फ़ाज़ली 

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वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
- दाग़ देहलवी 

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