अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
- गुलज़ार
ज़िंदगी क्या है इक कहानी है
ये कहानी नहीं सुनानी है
- जौन एलिया
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
औरों की बुराई को न देखूँ वो नज़र दे
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे
- खलील तनवीर
Urdu Poetry: बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना