अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है
- गुलज़ार
इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए
जिस का हम-साए के आँगन में भी साया जाए
- ज़फर ज़ैदी
हम-सफ़र हो तो कोई अपना-सा
चाँद के साथ चलोगे कब तक
- शोहरत बुख़ारी
Urdu Poetry: कोई रहता है आसमान में क्या