अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दिल कभी ख़्वाब के पीछे कभी दुनिया की तरफ़
एक ने अज्र दिया एक ने उजरत नहीं दी
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये ग़म नहीं है कि हम दोनों एक हो न सके
ये रंज है कि कोई दरमियान में भी न था
- जमाल एहसानी
कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं
यूँ देखती है जैसे मुझे जानती नहीं
- अंजुम रहबर
है ग़लत गर गुमान में कुछ है
तुझ सिवा भी जहान में कुछ है
- ख़्वाजा मीर दर्द
Urdu Shayari: मिरे हमराह दरिया जा रहा है