अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
लेकिन अपना अपना दामन
- जिगर मुरादाबादी
किसी को भेज के ख़त हाए ये कैसा अज़ाब आया
कि हर इक पूछता है नामा-बर आया जवाब आया
- अहसन मारहरवी
तुम अज़ीज़ और तुम्हारा ग़म भी अज़ीज़
किस से किस का गिला करे कोई
- हादी मछलीशहरी
मसर्रत ज़िंदगी का दूसरा नाम
मसर्रत की तमन्ना मुस्तक़िल ग़म
- जिगर मुरादाबादी
Urdu Poetry: सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो