Urdu Poetry: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना 
- निदा फ़ाज़ली 

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आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़
- हफ़ीज़ जौनपुरी 

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घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए
- निदा फ़ाज़ली 

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पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है
ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है
- बशीर बद्र 

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