Urdu Poetry: मौसम बहुत क़रीब है 'साहिल' चुनाव का

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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मौसम बहुत क़रीब है 'साहिल' चुनाव का
यूँही नहीं है हम पे इनायत का सिलसिला
- अज़ीमुद्दीन साहिल साहिल कलमनूरी 

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आ रही है फिर चुनाव की ख़बर
शहर भर में ख़ामुशी है आज-कल
- अशोक गोयल अशोक 

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वो इंतिक़ाम की आतिश थी मेरे सीने में
मिला न कोई तो ख़ुद को पछाड़ आया हूँ
- जमाल एहसानी 

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अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
- माहिर-उल क़ादरी 

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Urdu Poetry: ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ

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