अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तिरी आवाज़ के साथ
- आसी उल्दनी
ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
- अख़्तर शीरानी
यूँ ही आँखों में आ गए आँसू
जाइए आप कोई बात नहीं
- सलाम मछली शहरी
जब ज़रा रात हुई और मह ओ अंजुम आए
बार-हा दिल ने ये महसूस किया तुम आए
- असद भोपाली
Urdu Poetry: वो आएँगे थामे जिगर देख लेना