Urdu Poetry: इतने मायूस तो हालात नहीं, लोग किस वास्ते घबराए हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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इतने मायूस तो हालात नहीं
लोग किस वास्ते घबराए हैं
- जाँ निसार अख़्तर  

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अगर बदल न दिया आदमी ने दुनिया को
तो जान लो कि यहाँ आदमी की ख़ैर नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी 

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी 

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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
- क़ैसर-उल जाफ़री 

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Urdu Poetry: किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ

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