अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा
अँधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है
- अख़्तर शीरानी
लज़्ज़त-ए-ग़म तो बख़्श दी उस ने
हौसले भी 'अदम' दिए होते
- अब्दुल हमीद अदम
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल
वो हादसे भी दहर में हम पर गुज़र गए
जीने की आरज़ू में कई बार मर गए
- उनवान चिश्ती
Urdu Poetry: कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़