अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
शेर क्या है आह है या वाह है
जिस से हर दिल की उभर आती है चोट
- साहिर देहल्वी
हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं
- बिस्मिल सईदी
ख़त-ए-शौक़ को पढ़ के क़ासिद से बोले
ये है कौन दीवाना ख़त लिखने वाला
- साइल देहलवी
दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है
चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है
- नुशूर वाहिदी
Urdu Poetry: आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो