Urdu Poetry: झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं
- कैफ़ी आज़मी 

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कोई फ़रियाद तिरे दिल में दबी हो जैसे
तू ने आँखों से कोई बात कही हो जैसे
- फ़ैज़ अनवर 

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उजले उजले फूल खिले थे
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो
- बशीर बद्र 

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हर बात गवारा कर लोगे मिन्नत भी उतारा कर लोगे
ता'वीज़ें भी बंधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
- सईद राही 

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Urdu Poetry: यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है

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