अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
नतीजा सुन के कई लोग बद-हवास हुए
ख़ुदा का शुक्र है हम इम्तिहाँ में पास हुए
- कैफ़ अहमद सिद्दीकी
अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी
- साहिर लुधियानवी
वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से
मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
- वसीम बरेलवी
वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसर
दिन गिने जाते थे इस दिन के लिए
- अमीर मीनाई
Urdu Poetry: हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था