Urdu Poetry: अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल न थे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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अपनी क़िस्मत में सभी कुछ था मगर फूल न थे
तुम अगर फूल न होते तो हमारे होते
- अशफ़ाक़ नासिर 

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हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है अक्सर
लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं
- बिस्मिल सईदी 

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मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा
तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी
- बशीर बद्र

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फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी
- साहिर लुधियानवी 

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Urdu Poetry: शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है

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