अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
भूले से मोहब्बत कर बैठा, नादाँ था बेचारा, दिल ही तो है
हर दिल से ख़ता हो जाती है, बिगड़ो न ख़ुदारा, दिल ही तो है
- साहिर लुधियानवी
गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन
ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन
- ए जी जोश
पहले जो था, वो सिर्फ़ तुम्हारी तलाश थी
लेकिन जो तुम से मिल के हुआ है, ये इश्क़ है
- इरफ़ान सत्तार
वो कब आएँ ख़ुदा जाने सितारो तुम तो सो जाओ
हुए हैं हम तो दीवाने सितारो तुम तो सो जाओ
- क़ाबिल अजमेरी
Urdu Poetry: ख़्वाब होते हैं देखने के लिए, उन में जा कर मगर रहा न करो