Urdu Shayari: बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली  

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बदले हुए से लगते हैं अब मौसमों के रंग
पड़ता है आसमान का साया ज़मीन पर
- हमदम कशमीरी 

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तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़'
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
- अहमद फ़राज़ 

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कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो
- मोहसिन नक़वी 

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मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
दीवारों से सर टकराओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जाएगा
- सईद राही 

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Urdu Poetry: तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था

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