अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
- मिर्ज़ा ग़ालिब
मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई
ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा
वक़्त के साथ ज़माना भी बदल जाएगा
- अज़हर लखनवी
वक़्त करता है परवरिश बरसों
हादिसा एक दम नहीं होता
- क़ाबिल अजमेरी
Urdu Poetry: हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया