अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र
काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई
- जौन एलिया
मेरी कोशिश तो यही है कि ये मासूम रहे
और दिल है कि समझदार हुआ जाता है
- विकास शर्मा राज़
अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं
- जाँ निसार अख़्तर
Urdu Poetry: ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए