अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
-आल-ए-अहमद सुरूर
वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से
- फ़हीम जोगापुरी
ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
- माहिर-उल क़ादरी
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
- मंज़ूर हाशमी
Urdu Poetry: तुम्हारा नाम आया और हम तकने लगे रस्ता