Urdu Poetry: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई, जैसे एहसाँ उतारता है कोई

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली   

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दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई 
- गुलज़ार 

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आसमाँ अपने इरादों में मगन है लेकिन
आदमी अपने ख़यालात लिए फिरता है
- अनवर मसूद 

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दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
- हफ़ीज़ होशियारपुरी 

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अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
- माहिर-उल क़ादरी  

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Urdu Poetry: प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है

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