Urdu Poetry: तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
- क़ैसर-उल जाफ़री  

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जैसा मूड हो वैसा मंज़र होता है
मौसम तो इंसान के अंदर होता है
- अज़ीज़ एजाज़ 

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बिखरी ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शाइ'री
झुकती आँखों ने बताया मय-कशी क्या चीज़ है
- निदा फ़ाज़ली 

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वो लोग मेरे बहुत प्यार करने वाले थे
गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे
- जमाल एहसानी 

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Urdu Poetry: तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी

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