Urdu Poetry: जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं, वही दुनिया बदलते जा रहे हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
- जिगर मुरादाबादी 

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नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल
सफ़र में भी तो सदियों की मसाफ़त चाहिए है
- फ़रहत नदीम हुमायूँ 

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मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता
किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया
- अख़्तर नज़्मी 

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उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
- इरफ़ान सिद्दीक़ी 

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Urdu Poetry: आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

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