अमर उजाला काव्य डेस्क
जनवरी फ़रवरी और दिसम्बर
ठण्ड में जागी ठिठुरी रातें
- नय्यर रानी शफ़क़
तमाम रात महकता था उस की टेबल पर
गुलाब-ए-ताज़ा की ख़ुश्बू में फ़रवरी का शोर
- नीलोफ़र अफ़ज़ल
ले कर हिज्र की पहली तल्ख़ी चलता है
देखते हैं कि कब तक फ़रवरी चलता है
- राना अब्दुर्रब
मोहब्बतों से भरी फ़रवरी में सोचता हूँ
चुना था उस ने बिछड़ना भी किस महीने में
- सिराज फ़ैसल ख़ान
Urdu Poetry: 'जाड़े' का मौसम और ये शेर