Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क 

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किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ता निभाना किस क़दर आसान हो जाए
- वसीम बरेलवी

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हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
- शहरयार

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चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
- हसरत मोहानी

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नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
- शकील बदायूंनी

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Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

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