Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़
मुझ को आदत है मुस्कुराने की
- अब्दुल हमीद अदम 

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गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन
ऐसा लगा बसर हुए जन्नत में चार दिन
- ए जी जोश

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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
- ख़्वाजा मीर दर्द 

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Urdu Poetry: माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं

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