Urdu Poetry: अहमद फ़राज़ के चुनिंदा रूमानी शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं 

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अब के गर तू मिले तो हम तुझ से
ऐसे लिपटें तिरी क़बा हो जाएँ 

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कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते 

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हम को अच्छा नहीं लगता कोई हमनाम तिरा
कोई तुझ सा हो तो फिर नाम भी तुझ सा रक्खे 

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Urdu Poetry: देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम

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