Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर
झुक कर सलाम करने में क्या हर्ज है मगर
सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े
- इक़बाल अज़ीम
बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तिरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी
- बहादुर शाह ज़फ़र
चेहरे पे सारे शहर के गर्द-ए-मलाल है
जो दिल का हाल है वही दिल्ली का हाल है
- मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
- जौन एलिया
Urdu Poetry: उर्दू के मशहूर शेर