अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे रहना। खुद पर भरोसा रखें।
ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं। हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रखकर चिल्लाते हैं कि अंधेरा है।
खड़े हो जाओ, साहसी बनो, मजबूत बनो। सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लो, और जान लो कि तुम अपने भाग्य के निर्माता खुद हो
दुनिया एक महान व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।
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