Urdu Ghazal: परवीन शाकिर के चुनिंदा शेर
ये क्या कि वो जब चाहे मुझे छीन ले मुझ से
अपने लिए वो शख़्स तड़पता भी तो देखूँ
वो अपनी एक ज़ात में कुल काएनात था
दुनिया के हर फ़रेब से मिलवा दिया मुझे
तितलियाँ पकड़ने में दूर तक निकल जाना
कितना अच्छा लगता है फूल जैसे बच्चों पर
वो नर्म लहजे में कुछ तो कहे कि लौट आए
समाअ'तों की ज़मीं पर फुवार का मौसम
बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की
और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए
Urdu Poetry: शजर यानी पेड़ पर चुनिंदा शेर