अमर उजाला काव्य डेस्क
हयात ले के चलो कायनात ले के चलो
चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो
- मख़दूम मुहिउद्दीन
बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
- मीर तक़ी मीर
तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं
- अल्लामा इक़बाल
जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
- जिगर मुरादाबादी
वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है
- बिस्मिल अज़ीमाबादी
Urdu Poetry: राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर