Urdu Poetry: गुलज़ार के चुनिंदा शेर

Urdu Poetry: गुलज़ार के चुनिंदा शेर 

Image Credit :


आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई 

Image Credit :


जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते 

Image Credit :


आँखों और कानों में कुछ सन्नाटे से भर जाते हैं
क्या तुम ने उड़ती देखी है रेत कभी तन्हाई की 

Image Credit :


तुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए
कुछ भँवर डूब गए पानी में चकराते हुए 

Image Credit :


उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले 

Image Credit :


दिल अगर है तो दर्द भी होगा
इस का कोई नहीं है हल शायद 

Image Credit :


आप ने औरों से कहा सब कुछ
हम से भी कुछ कभी कहीं कहते 

Image Credit :

Urdu Poetry: शारिक़ कैफ़ी के चुनिंदा शेर

Read Now